अतीत पर गर्व। भविष्य के लिए उद्देश्य।

उन लोगों की कहानी जिन्होंने स्वयं से आगे बढ़कर निर्माण किया—दिल में रापर रखते हुए वागड़ और मुंबई के परिवारों की सेवा की।

कच्छ की खेती वाली भूमि में साथ चलते दो पीढ़ियों के लोग

कच्छ के ऐतिहासिक वागड़ क्षेत्र में रापर

पवित्र भूमि पर कठोर परिश्रम।

ऐतिहासिक वागड़ क्षेत्र के हृदय रापर में रहते हुए लेउवा पाटीदार समाज केवल समुदाय नहीं रहा; वह समर्पण, परोपकार और अटूट एकता का जीवंत प्रतीक बना।

भूमि पर श्रम और दूर तक फैले उद्यम से समुदाय ने पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित करने वाली पहचान बनाई। सफलता कभी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानी गई; उसने लौटकर उत्थान और सेवा की जिम्मेदारी दी।

वसुधैव कुटुम्बकम्

सारा विश्व एक परिवार है।

लेउवा पाटीदार समाज ने अपनी चिंता कभी स्वयं तक सीमित नहीं रखी। अन्य समुदायों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उसने ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ के भाव को जिया है।

रापर ने हमें गढ़ा। मुंबई ने लौटाने की हमारी क्षमता बढ़ाई।

समुदाय के सदस्यों ने भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में व्यापार और उद्योग में उल्लेखनीय ऊँचाइयाँ पाईं। शहर को कर्मभूमि बनाया, पर जन्मभूमि को कभी नहीं भूले।

व्यापारियों और दानदाताओं ने अपनी संपदा व अनुभव रापर की शिक्षा, स्वास्थ्य, धार्मिक उत्सवों और प्राकृतिक आपदा राहत में लगाए। इस उदारता ने समाज से परे भी सम्मान दिलाया।

जारी कहानी के चार महत्वपूर्ण पड़ाव।

पंजीकरण ने सेवा शुरू नहीं की; उसने दशकों के कार्य को स्थायी घर दिया।

  1. 1985 से पहले

    संरचना से पहले सेवा

    रापर में बुजुर्ग और युवा सामाजिक, शैक्षिक व धार्मिक सेवा में पहले से सक्रिय थे।

  2. 2001

    साझे उत्सव की परंपरा

    श्री लेउवा पाटीदार मित्र मंडल के अंतर्गत वार्षिक सामूहिक विवाह समारोह शुरू हुए।

  3. 2024

    रापर और मुंबई, एक छत के नीचे

    मुंबई में विशाल सामुदायिक मिलन ने हजारों सदस्यों को जोड़कर साझा उद्देश्य नया किया।

  4. 2025

    ट्रस्ट का औपचारिक पंजीकरण

    दशकों के सामुदायिक कार्य को आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत आधिकारिक संरचना मिली।

तीन दशकों का साथ।

श्री परबतभाई सामाभाई करोतरा के नेतृत्व में मित्र मंडल ने तीन दशकों से अधिक समय तक एकता, विवाद समाधान, अन्याय का विरोध और निर्भय जीवन के लिए काम किया है।

2001 से इसके वार्षिक सामूहिक विवाह समारोह साझा आनंद और सामूहिक गरिमा से विवाह मनाते आए हैं।

हमारा इतिहास आज भी लिखा जा रहा है।

इसे आगे बढ़ाने वाले लोगों से मिलें।

हमारे नेतृत्व से मिलें