अतीत पर गर्व। भविष्य के लिए उद्देश्य।
उन लोगों की कहानी जिन्होंने स्वयं से आगे बढ़कर निर्माण किया—दिल में रापर रखते हुए वागड़ और मुंबई के परिवारों की सेवा की।

कच्छ के ऐतिहासिक वागड़ क्षेत्र में रापर
जहाँ कहानी शुरू होती है
पवित्र भूमि पर कठोर परिश्रम।
ऐतिहासिक वागड़ क्षेत्र के हृदय रापर में रहते हुए लेउवा पाटीदार समाज केवल समुदाय नहीं रहा; वह समर्पण, परोपकार और अटूट एकता का जीवंत प्रतीक बना।
भूमि पर श्रम और दूर तक फैले उद्यम से समुदाय ने पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित करने वाली पहचान बनाई। सफलता कभी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानी गई; उसने लौटकर उत्थान और सेवा की जिम्मेदारी दी।
सारा विश्व एक परिवार है।
लेउवा पाटीदार समाज ने अपनी चिंता कभी स्वयं तक सीमित नहीं रखी। अन्य समुदायों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उसने ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ के भाव को जिया है।
दो स्थान, एक अपनापन
रापर ने हमें गढ़ा। मुंबई ने लौटाने की हमारी क्षमता बढ़ाई।
समुदाय के सदस्यों ने भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में व्यापार और उद्योग में उल्लेखनीय ऊँचाइयाँ पाईं। शहर को कर्मभूमि बनाया, पर जन्मभूमि को कभी नहीं भूले।
व्यापारियों और दानदाताओं ने अपनी संपदा व अनुभव रापर की शिक्षा, स्वास्थ्य, धार्मिक उत्सवों और प्राकृतिक आपदा राहत में लगाए। इस उदारता ने समाज से परे भी सम्मान दिलाया।
सेवा कैसे संस्था बनी
जारी कहानी के चार महत्वपूर्ण पड़ाव।
पंजीकरण ने सेवा शुरू नहीं की; उसने दशकों के कार्य को स्थायी घर दिया।
श्री लेउवा पाटीदार मित्र मंडल
तीन दशकों का साथ।
श्री परबतभाई सामाभाई करोतरा के नेतृत्व में मित्र मंडल ने तीन दशकों से अधिक समय तक एकता, विवाद समाधान, अन्याय का विरोध और निर्भय जीवन के लिए काम किया है।
2001 से इसके वार्षिक सामूहिक विवाह समारोह साझा आनंद और सामूहिक गरिमा से विवाह मनाते आए हैं।
हमारा इतिहास आज भी लिखा जा रहा है।

